दीक्षा-
श्रीरूद्रसंप्रदाय के जगद्गुरु श्रीविल्वमंगलाचार्यजी द्वारा आप अष्टादशाक्षर गोपालमन्त्र की दीक्षा दी थी तथा श्रीविल्वमंगलाचार्यजी द्वारा आप वल्लभाचार्य महाप्रभु को श्रीरूद्र वेदव्यास विष्णुस्वामी संप्रदाय का जगद्गुरु आचार्य तिलक साम्राज्याभिषेक किया गया।
सिद्धान्त-
भगवान श्रीकृष्ण के अनुग्रह को पुष्टि कहा गया है।भगवान के इस विशेष अनुग्रह से उत्पन्न होने वाली भक्ति को 'पुष्टिभक्ति' कहा जाता है।
भगवान् श्रीकृष्ण भक्तों के निमित्त व्यापी वैकुण्ठ में [जो विष्णु के वैकुण्ठ से ऊपर स्थित है] नित्य क्रीड़ाएं करते हैं। इसी व्यापी वैकुण्ठ का एक खण्ड है- गोलोक, जिसमें यमुना, वृन्दावन, निकुंज व गोपियां सभी नित्य विद्यमान हैं। भगवद्सेवा के माध्यम से वहां भगवान की नित्य लीला-सृष्टि में प्रवेश ही जीव की सर्वोत्तम गति है।