पता: गोवर्धन
सिंदूरी शिला वह शिला है जहाँ स्वयं श्री राधा ने शिला पर अपनी ऊँगली के घर्षण से सिंदूर प्रकट किया था एवं अपने मांग में धारण किया था ।
पता: गोवर्धन
काजल और राधा रानी की आँखों में काजल लगाया। तबसे यह शिला के दर्शन यहाँ होते हैं और भक्त यहाँ आते हैं इस शिला में से काजल अपनी आँखों में लगाते हैं।
पता: गोवर्धन
सिंदूरी शिला वह शिला है जहाँ स्वयं श्री राधा ने शिला पर अपनी ऊँगली के घर्षण से सिंदूर प्रकट किया था एवं अपने मांग में धारण किया था ।
पता: गोवर्धन
ब्रज में श्रृंगार" का अर्थ है ब्रज में सजावट, श्रृंगार या आकर्षण, विशेषकर राधा जी के संदर्भ में, जो ब्रज की सुंदरता का प्रतीक हैं।
पता: गोवर्धन
जहाँ अद्भुत नज़ारा महल की अटारी से , साँकरी खोर की सुगंधित शिला , गेहवर वन में पुकार श्री जी की , हृदय को शीतल करता प्रिया कुण्ड का जल ..हाँ यही बरसाना है।
पता: गोवर्धन
गोवर्धन पर्वत पर सुंदर शिला पर श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य ने दीपावली और अनाकुट उत्सव मनाया और सवा किलो चावल का उपयोग किया।
पता: गोवर्धन
सिंदूरी शिला वह शिला है जहाँ स्वयं श्री राधा ने शिला पर अपनी ऊँगली के घर्षण से सिंदूर प्रकट किया था एवं अपने मांग में धारण किया था ।
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श्री कृष्ण और उनके मित्र गाय चराने के लिए जिस जगह पर जाया करते थे वह है काम्यवन। यहां पर कान्हा अपने दोस्तों के साथ कई घंटों तक इस पत्थर के स्लाइड जिसे फिसलनी शिला कहते है, उस पर खेलने का आनंद लिया करते थे। 'फिसलनी' शब्द का अर्थ है 'फिसलने वाला' और 'शिला'
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चित्र-विचित्र-शिला" का अर्थ है "चित्र विचित्र शिला" या "अजीब और अनोखी चट्टान"। यह एक ऐसी चट्टान है जो अपनी अनोखी बनावट और विशेषताओं के लिए जानी जाती है।
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देवराज इन्द्र ने हार मानकर श्रीकृष्णजी को कामधेनु गाय के दूध से स्नान कराया था। और उन्हें गोविन्द कहकर पुकारा था । पर्वत के मध्य शिलाओं में श्रीकृष्णजी की छड़ी, टोपी आदि हैं ।
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सिंदूरी शिला वह शिला है जहाँ स्वयं श्री राधा ने शिला पर अपनी ऊँगली के घर्षण से सिंदूर प्रकट किया था एवं अपने मांग में धारण किया था ।