पहली बैठक न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सांस्कृतिक दृष्टि से भी गहरे अर्थ रखती है।
पता: गोकुल , उत्तर प्रदेश
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श्री महाप्रभुजी का दूसरा आसन गोकुल में है,और यहीं पर भोजन करते थे और दिव्य उपदेश देते थे।
पता: बड़ी बैठक जी पो. गोकुल जिला - मथुरा (उ.प्र.)
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यहां पर ज़मीन के अंदर द्वापर युग से एक योगेश्वर बैठकर तपस्या कर रहे थे, उन्होंने बाहर निकलकर दंडवत प्रणाम किया।
पता: शैया मंदिर
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श्री महाप्रभुजी ने अपनी बांसुरी को हर वृक्ष के नीचे रखा और चार-हाथों वाली रूप में हर पत्ते में निवास किया ।
पता: वृंदावन मथुरा (उ.प्र)
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मथुरा के विश्राम घाट पर है। यहां पर सिकन्दर लोदी के हाकिम द्वारा एक यंत्र लगवाया गया था जिसके नीचे से हिन्दू निकलता था।
पता: मथुरा (उत्तर प्रदेश)
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मथुरा से श्रीमहाप्रभु वल्लभाचार्य मदुवन की ओर गए, जहाँ उन्होंने श्री ब्रह्मनाभ द्वारा स्थापित भगवान मधुवनियान के मंदिर के दर्शन किए।
पता: महोली, मथुरा (उत्तर प्रदेश)
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श्री महाप्रभुजी ने तब भगवद गीता का श्लोक कहा,"मैं तुम्हें दिव्य दृष्टि प्रदान करता हूँ ताकि तुम मेरे दिव्य स्वरूप का दर्शन कर सको।"
पता: मथुरा,(उत्तर प्रदेश)
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श्रीमद्भागवतम पर प्रवचन दिए।उस क्षेत्र के ब्राह्मणों ने श्रीमहाप्रभुजी से प्रार्थना की पवित्र बहुला गाय की पूजा करने से मना कर दिया है।.
पता: मथुरा (उत्तर प्रदेश)
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राधा कुंड झील के पवित्र जल में श्री राधा के दिव्य महल का अस्तित्व है। श्री गुसाईंजी का आसन भी स्थित है।
पता: मथुरा (उत्तर प्रदेश)
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मानसी गंगा के ऊपर आपकी बैठक है मानसी गंगा का आधिदैविक दुग्धमय स्वरूप के दर्शन करवाये।
पता: पो.गोवर्धन मथुरा(उ.प्र)
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चन्द्रसरोवर से कुछ ही दुरी पर छोड़कर के निचे आपकी बैठक है उन्होंने बाहर निकलकर दंडवत प्रणाम किया।
पता: मथुरा (उ.प्र)
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श्री महाप्रभुजी ने अपनी बांसुरी को हर वृक्ष के नीचे रखा और चार-हाथों वाली रूप में हर पत्ते में निवास किया।
पता: सद्दू पांडे का घर, पो. आन्योर,मथुरा (उ.प्र)
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यहां श्री महाप्रभुजी ने तीन दिन तक भागवत् पारायण *। यहां श्री महाप्रभुजी ने कृष्णदास मेघन को गिरिराज कंदरा में व्यापी बैकुंठ तथा लीला सामग्री के दर्शन ये।
पता: जिला मथुरा (उ.प्र.)
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सुंदरशिला के सामने छोकर के नीचे श्री आचार्यजी की बैठक है। यहां आपने श्री गोवर्धन पूजा करी, दीपमालिका करी और सवा सेर भात का अन्नकूट उत्सव किया।
पता: पोस्ट जतीपुरा, जिला मथुरा (उ.प्र.)
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श्री गिरिराज के ऊपर श्रीनाथजी के मंदिर में एक चौतरी पर श्री महाप्रभुजी की बैठक है। एक समय आप श्रीनाथजी का श्रृंगार करके उस चौतरी पर विराज रहे थे।
पता: पोस्ट जतीपुरा, जिला मथुरा (उ.प्र.)
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कामवन में सुरभि कुंड (श्रीकुंड) के ऊपर छोकर वृक्ष के नीचे श्री आचार्यजी की बैठक है। यहां आपने चोरासी कुण्ड में स्नान करके श्री भागवत् सप्ताह किया।
पता: श्री कुंण्ड, पो. कामा, जिला भरतपुर (राज.)
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गहरवन में कुंड के ऊपर आप श्री की बैठक है । आपने यहां सात दिन विराजकर श्रीभागवत् पारायण किया। एक दिन गहरवन में एक बड़ा अजगर दिरवाई दिया।
पता: पो. बरसाना, जि. मथुरा
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यह बैठक संकेत वन के समीप कृष्णकुंड के ऊपर छोकर के नीचे है।भागवत में एक सोलह वर्षीय बहुत सुन्दर स्त्री अनेक आभूषण पहिने।
पता: पो. बरसाना, जिला मथुरा (उ.प्र.)
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नंदगांव में पान सरोवर के ऊपर श्री आचार्यजी की बैठक है। आप यहां छैः माह विराजे और आज्ञा की जो यहां उद्धवजी छैः माह विराजे है।
पता: पोस्ट नंदगांव, जिला मथुरा (उ.प्र.)
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कोकिलावन में श्री कृष्णकुंड के ऊपर छोकर के नीचे श्रीआचार्यजी की बैठक है। यहां पर निम्बार्क संप्रदाय के चतुरा नागा नामक एक संत ने अपने एक हजार शिष्यों के साथ श्री महाप्रभुजी के दर्शन किये ।
पता: जिला मथुरा (उ.प्र.)
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भांडीरवन में श्री महाप्रभुजी ने सात दिन तक श्री भागवत् पारायण किया। यहां एक माध्व संप्रदाय का व्यासतीर्थ स्वामी महंत रहता था।
पता: जिला मथुरा
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यहां आपने तीन दिन तक भागवत पारायण किया। यहां श्री दामोदरदास हरसानी को अर्धरात्रि के समय श्रीमहाप्रभुजी ने पुरूषोत्तम क्रांति स्वरूप के दर्शन दिये ।
पता: जिला मथुरा
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सूकर क्षेत्र (सोरमजी) में श्री आचार्यजी ने एक सप्ताह तक भागवत् पारायण किया था। यहीं पर श्रीकृष्णदास मेघन के पूर्व गुरू रहते थे।
पता: पोस्ट सौरो, जिला अटौहा (उ.प्र.)
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चित्रकूट में श्री रामचन्द्रजी ने चातुर्मास किया था श्री महाप्रभुजी ने श्री भागवत का पारायण करके 16 दिन तक रामायण का पाठ किया। चित्रकूट के समीप कान्तानाथ पर्वत है।
पता: पोस्ट पिली कोठी, (म.प्र.)
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अयोध्या में सरयू के तीर गुसाई घाट पर श्री महाप्रभुजी की बैठक है। एक समय श्री महाप्रभुजी श्री रामचन्द्रजी की बैठक में मिलने को पधारे और मर्यादा पुरुषोत्तमाय नमः कहा।
पता: पो. अयोध्या, जिला - फैजाबाद (उ.प्र.)
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लखनऊ से बालामऊ जंक्शन में गोविन्दकुंड के ऊपर छोकर वृक्ष के नीचे आपकी बैठक है। यहां आपने सात दिन तक श्रीभागवत् का पारायण किया।
पता: नेमीषारण्य, (उ.प्र.)
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श्री काशी में सेठ पुरूषोत्तमदास के घर श्री महाप्रभुजी की बैठक है । यहीं पर आपने पहला नंदमहोत्सव किया। उस समय श्री नंदरायजी, श्री यशोदाजी, ब्रज है।
पता: जतन रोड़, दूध हट्टी के पास, वाराणसी
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दूसरी बैठक, पंचघाट सन्यास ग्रहण कर आप काशी में हनुमान घाट पर आकर रहे। आप एक माह तक एक शिला पर अन्न जल सब त्याग कर विराजे रहे।
पता: पंचघाट सेठ पुरूषोत्तमदास जी का घर, जतनबड़ चैतन्य रोड़ दूध हट्टी के पास, वाराणसी जिला - काशी (उ.प्र.)
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गंगाजी और गण्डकी के संगम पर भगवदीय भगवानदास के घर में यह बैठक है। श्री आचार्यजी यहां अरखंड विराजमान है। जब आचार्यजी भगवानदास के घर से अडेल आने का कहते है।
पता: वैद्यनाथ धाम, जि. वैशाली (बिहार)
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यह बैठक जनकपुर में माणिकतालाब के ऊपर भगवानदासजी के बाग में हैं। यहां श्री राम जानकीजी ने गठ जोरे से स्नान किया और यहीं श्रीरामजी की बारात उतरी थी।
पता: माणिक बाग ग्राम छोटी ढीगी (हाजीपुर) के पास, जनकपुर, जिला वैशाली (बिहार)
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यहां कपिल आश्रम में कपिलकुंड के ऊपर छोकर वृक्ष के नीचे श्री आचार्यजी की बैठक है। यह वन सिंह गजराज, गेंडा, हिरण आदि जंगली जानवरों से भरा पड़ा था।
पता: कुण्ड, गंगासागर (पश्चिम बंगाल)
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यह श्री महाप्रभुजी के प्राकट्य स्थल की बैठक हैयज्ञ नारायण भट्टजी ने प्रथम सोमयज्ञ किया तब यज्ञ के कुण्ड से भगवत् आज्ञा हुई कि तुम्हारे वंश में जब 100 सोमयज्ञ पूर्ण हो जावेगे।
पता: छटी धर में चम्पारण्य, व्हाया राजीम, जिला - रायपुर (छत्तीसगढ़).,
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इस स्थान पर श्री महाप्रभुजी के प्राकट्य के बाद छटी का पूजन हुआ था । इस अवसर पर काशी से माधवेन्द्रयति और पुष्कर से मुकुन्ददास आए थे।
पता: प्राकट्य स्थल (पहली बैठक) चम्पारण्य राजीम, जिला - रायपुर
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यह बैठक जगन्नाथपुरी के दक्षिणउड़ीसा) यह बैठक जगन्नाथपुरी के दक्षिण दरवाजे के पास है। यहां आप एक वर्ष तक विराजे। यहां के राजा विष्णुदेव के दरबार में बहुत से पंडितो में विवाद हुआ है।
पता: ग्रान्ड रोड, पुरी (उड़ीसा
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मध्य रेल्वे की कुर्दवाड़ी मिरज नेरोलाईन पर कुर्दवाड़ी सेसे पंढरपुर 53 किमी. है ।पंढरपुर क्षेत्र में भीमरथी के तीर पर श्रीमहाप्रभुजी की बैठक है।
पता: महाराष्ट्र
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यहां श्री रामचन्द्रजी ने तपस्याकी और श्रीसीताजी का हरण यहीं से हुआ। पंचवटी में गोदावरी नदी के घाट के समीप श्री महाप्रभुजी की बैठक है।
पता: पूसा, पंचवटी
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पना नृसिंह में छोंकर वृक्ष के नीचे श्री आचार्य ने भागवत् पारायण किया। यहां श्रीनृसिंह भगवान और आचार्य श्री का मिलन हुआ। आपनी ने पना सिद्ध करके भगवान नृसिंह को भोग है।
पता: विजयवाड़ा(आन्ध्रप्रदेश)
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श्री लक्ष्मण बालाजी का श्रृंगार करते समय आपके पिता श्री लक्ष्मण भट्टजी श्री मुख में लीन हो गये थे। सूतक निवृत्त पीछे आपने छोकर वृक्ष के नीचे भागवत् है।
पता: कर्नाटक, तिरूपति (आन्ध्र)
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यह बैठक श्रीरंगजी में कावेरी नदी के तट पर छोकर वृक्ष के नीचे है। श्री रंगजी के पूछने पर श्रीनाथजी की प्रागट्य वार्ता सविस्तारहै।
पता: त्रिचनापल्ली (दक्षिण रेल्वे के तिरुचिरापल्ली स्टेशन के पास)
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विष्णु की साड़े तीन पुरी में आधी पुरी विष्णु कांची है। (बाकी-1 मथुरापुरी, 2 अयोध्यापुरी, ३ द्वारिकापुरी है)
पता: कांचीपुरम (तमिलनाडु)
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सेतुबन्ध रामेश्वर में एक छोकर वृक्ष के नीचे भागवत् सप्ताह पारायण किया। आपने कृष्णदास मेघन से कहा था कि रामेश्वरजी भगवान श्री रामचन्द्रजी के स्वरूप है।
पता: रामेश्वर जिला - रामनाड (तमिलनाडु)
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यहां आचार्यजी ने चंदन वृक्ष के नीचे भागवत् सप्ताह पारायण किया। यहां श्री हेमगोपालजी ठाकुरजी विराजते है।
पता: उटकमंड के पास, तमिलनाडु
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बैठक, तिरूनेवली रेल्वे स्टेशन के पास (अप्रकट) यहां आपने छोकर के नीचे भागवत् पारायण किया। यहां का राजा बहुत बीमार था। सब उपाय कर लिये लेकिन राजा ठीक नहीं हुआ।
पता: पणजी, गोआ
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यहां आपने छोकर के नीचे भागवत् पारायण किया। यहां का राजा बहुत बीमार था। सब उपाय कर लिये लेकिन राजा ठीक नहीं हुआ।
पता: तिरूनेवली रेल्वे स्टेशन के पास,(तमिलनाडु)
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यहां पीपल के वृक्ष के नीचे आपने श्री भागवत् सप्ताह परायण किया। यहां चारों और तैलंग ब्राह्मण मायावादियों का जोर था। आपने उनसे शास्त्रार्थ कर मायावाद का खंडन है।
पता: कृष्णा (कर्णाटक)
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पंपासरोवर पर वट वृक्ष के नीचे आपश्री ने भागवत् सप्ताह परायण किया। कई तामसी जीवों का उद्धार किया। यहीं रामावतार के समय से बैठा एक पक्षी है।
पता: डम्पीगाँव (आँध्रप्रदेश)
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यह बैठक शमी वृक्ष के नीचे है। आप जब यहां पधारे तब भगवान श्री पद्मनाभजी ने अपने मुखिया आनंदराम से कहा कि जाओ श्रीमहाप्रभुजी को भक्तिमार्ग की रीत से विनती करके मंदिर में पधराय लाओ।
पता: पौढ़ानाथ, त्रिवेन्द्रम पो. तिरुवंतपुरम (केरल)
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यह बैठक जनार्दनजी में कुंड के पास शमी वृक्ष के नीचे है। यहां आचार्यश्री ने भागवत् सप्ताह की। तथा भगवान श्री जनार्दनजी की सेवा एवं श्रृंगार किए तथा सामग्री भोग धरी ।
पता: पो. बरकला (केरल)
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यह बैठक विद्यानगर में विद्याकुंड के ऊपर है। यहां आचार्य श्री ने राजा कृष्ण देव के दरबार में मायामत का खंडन किया और ब्रह्मवाद का स्थापन है।
पता: विद्यानगर डम्पीगाँव (आँध्रप्रदेश)
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यह बैठक छोकर वृक्ष के नीचे है। यहां भी बहुत से मायावादियों को निरूतर किया और भक्ति मार्ग का स्थापन किया। कई ब्राह्मणों को आपने अपनी शरण में लिया।
पता: त्रिलोक ताम्रपर्णी नदी के पास, तोताद्री पर्वत (तमिलनाडु)
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तोताचल पर्वत के पास घने वन में एक वट के आचार्यश्री विराजे। तब कृष्णदास मेघन ने विनती करो महाराज यहां आसपास दूर है।
पता: नांगनेरी, तिरुनोल्ली
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यहाँ दर्भ शय्या पर शयन करते हुए भगवान विष्णु का विशाल मंदिर है । आप श्री ने यहां भागवत सप्ताह किया। श्री ठाकुरजी ने आप को यह आज्ञा दी थी कि आपके वंश में सब पुरूषोत्तम होंगे।
पता: आदिसेतु (तमिलनाडु) जिला – रामनाड़पुरम
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अपनी पृथ्वी परिक्रमा के दौरान एक बार महाप्रभुजी कांकरवाड़ से पंढरपुर होते हुए सूरत पधारे । यहाँ ताप्तीजी के किनारे अश्विनी कुमार आश्रम के पास श्री महाप्रभुजी को बैठक है।
पता: सूरत, गुजरात
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भृगु क्षेत्र में परंम पवित्र श्री नर्मदाजी के किनारे छोकर वृक्ष के नीचे श्रीमद् वल्लभाचार्यजी की बैठक है। यहाँ पर श्री नर्मदाजी स्वयं स्त्रीरूप धारण कर आपके दर्शनों है।
पता: भरूच (गुजरात)
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मोरबी महाराज मयूर ध्वज की नगरी है। यहां श्री महाप्रभुजी ने भागवत् सप्ताह पारायण किया। कुण्ड के ऊपर छोकर वृक्ष के नीचे आप श्री की बैठक है।
पता: मौरबी, सौराष्ट्र
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नागमती नदी के तीर पर छोंकर वृक्ष के नीचे श्री महाप्रभुजी विराजते थे । यहीं पर आपने श्रीमद् भागवत का पारायण किया । नवानगर के राजा जामतमांची है।
पता: कालाबड़ गेट रोड़, जामनगर
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जाम खम्बालिया में परम कृपाल श्री वल्लभाचार्यजी एक कुन्ड के ऊपर छोकर वृक्ष के नीचे विराजित होकर श्रीमद् भागवद का पारायण करते थे।
पता: जामनगर व्हाया द्वारका
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दुर्वासा ऋषि के वास स्थल पिण्ड तारक में छोकर वृक्ष के नीचे आपश्री ने भागवत् पारायण किया। यहां के तीर्थ पुरोहित को आशीर्वाद दिया ।
पता: पो. पिंडरा, जि. जामनगर, व्हा. द्वारका
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पुण्य सलिला गोमतीजी के किनारे महाप्रभुजी की बैठक है । श्री गोमतीजी जलरूप में बैकुण्ठ से द्वारिका पधारी है ।
पता: गोमती व्हाया द्वारका
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जब महाप्रभुजी द्वारका पधारे तो श्री द्वारकाधीशजी ने अपने सेवक गोविन्ददास ब्रह्मचारी को श्रीमहाप्रभुजी को बुलाने भेजा । तब श्री महाप्रभुजी ने पधारकर श्री द्वारकाधीश जी का श्रृंगार किया, भोग धरा तथा आरती की।
पता: द्वारका
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गोपी तलैया में छोकर के वृक्ष के नीचे है।यह बैठक ब्रज की सब कुमारिकाओं ने यहां श्री कृष्ण के संग रास है।
पता: जामनगर, व्हा. द्वारका
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शंखासुर दैत्य का वध करके श्री प्रभु ने इस स्थल पर शंख प्राप्त किया था । यहां श्री शंखनारायणजी बिराजते है।
पता: जामनगर
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कच्छ की राजधानी भुज है जहां से 135 किलोमीटर पर नारायण सरोवर है ।) नारायण सरोवर पर मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम के पास शमी वृक्ष के नीचे आपने भागवत् पारायण किया था।
पता: जिला कच्छ
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यहां गिरनार और रेवत पर्वत ब्राम्हण रूप में आये और श्री महाप्रभुजी से भागवत कथा सुनाने की प्रार्थना की।
पता: गिरनार रोड़, जूनागढ़
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सोमनाथजी स्वयं भागवत् की कथा सुनने आते थे और चुपचाप एक कोने में बैठकर कथा सुनते थे । किसी को उनकी उपस्थिति का आभास भी नहीं होता था ।
पता: जिला जूनागढ
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माधवपुर में वनक्षेत्र में कदम कुण्ड पर श्री महाप्रभुजी ने भागवत सप्ताह किया था। यहीं पर आपश्री ने माधवरायजी का नया मंदिर बनवाकर सेवा का क्रम निर्धारित किया।
पता: , जिला जूनागढ़
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प्रयाग कुण्ड के उपर छोंकर वृक्ष के नीचे श्री आचार्यजी की बैठक है। यहाँ पर एक ब्राह्मण आपकी शरण में आया। जिसे आपने नाम निवेदन दीक्षा दी। उसे आपने कहा कि आठ दिनों का है।
पता: जिला जूनागढ़
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यहां श्री महाप्रभुजी ने भागवत् सप्ताह किया । यहां एक ग्रहस्थ ब्राह्मण के घर चौतरा पर विराजे । आपने कृपाबल से ग्रह स्वामी को अपने दोनों पुत्रों में कृष्ण बलराम
पता: अहमदाबाद-
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अहमदाबाद से पूर्व की ओर तीन किलोमीटर पर नरोड़ में गोपालदास क्षत्रिय के घर श्री महाप्रभुजी ने भागव सप्ताह किया था । आपने उन्हें श्यामलालजी का स्वरूप सेट के लिए पधराया था ।
पता: अहमदाबाद
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यह बैठक श्री राणा व्यास के घर में है । राणा व्यास महापंडित थे । लेकिन काशी में पंडितों से शास्त्रार्थ में अहंकारवश हार गये, तब गंगाजी में आत्महत्या करने जा रहे थे । उस समय श्री वल्लभाचार्यजी वैष्णवों को बता रहे थे।
पता: गुजरात
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खेरालु में जगन्नाथ जोशी के घर श्री महाप्रभुजी बिराजे थे। जगन्नाथ जोशी की माताजी भगवदीय महिला थी ।
पता: महसाणा
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सिद्धपुर में बिन्दु सरोवर पर कर्दम ऋषि के आश्रम के पास श्री महाप्रभुजी की बैठक है। इसी स्थल पर श्री कपिल देवजी ने माता देवहुतीर्ज है।
पता: महसाणा
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अवन्तिका के अंकपात क्षेत्र में गोमती कुण्ड पर पीपल के वृक्ष के नीचे श्री महाप्रभुजी ने भागवत पारायण किया।
पता: मंगलनाथ मार्ग, उज्जैन (म.प्र.)
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नीचे श्री महाप्रभुजी ने भागवत् सप्ताह किया था। ब्रह्माजी की उत्पत्ति नाभि कमल से यहीं हुई थी । यहाँ ब्रह्माजी का मंदिर है । पुष्करजी सब तीर्थों के पिता रूप है।
पता: जिला अजमेर
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कुरुक्षेत्र में कुण्ड के ऊपर श्रीमहाप्रभुजी ने भागवत पारायण किया। आपश्री ने मेघन को आज्ञा की कि यह धर्म क्षेत्र है जहाँ महाभारत युद्ध हुआ था ।
पता: कुरूक्षेत्र
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यहां आपश्री ने सं. 1576 में कुंभ पर्व पर पधार कर भागवत् सप्ताह किये। जिसका रस बहुत से संतों और गृहस्थों को मिला । इस समय आपके साथ श्री दामोदरदास हरसानी है।
पता: हर की पेढ़ी मार्ग, रामघाट, हरिद्वार
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श्री महाप्रभुजी ने यहां भागवत् सप्ताह किया । वामन द्वादशी के दिन फलाहार न मिलने पर भगवान बद्रीनाथजी ने कहा उत्सवान्ते च पारणम् । भगवत् आज्ञा मानकर रसोई है।
पता: बद्रीनाथ (उ.प्र.)
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केदार कुंड पर श्रीमहाप्रभुजी ने भागवत् सप्ताह किया था। श्री केदानाथजी योगेश्वर रूप में कथा सुनने के लिए पधारते थे।
पता: केदारनाथजी (उ.प्र.)
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व्यासजी की इच्छानुसार आपश्री ने युगल गीत के । श्लोक की व्याख्या तीन दिनों तक की। श्री मेघन गुफा के बाहर तीन दिन तक खड़े रहे । श्री महाप्रभुजी ने प्रसन्न कर तीन वर मांगने को कहा ।
पता: कैशव प्रयाग, बद्रीनाथ (उ.प्र.)
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हिमालय में श्रीमहाप्रभुजी ने श्रीमद्भागवत पारायण किया। यह बैठक गुप्त है। ऐसी मान्यता है कि नगाधिराज हिमालय ब्राह्मण का वेश धरकर श्रीमद्भागवत् श्रवण करने आया करते थे ।
पता: हिमालय पर्वत
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व्यास गंगा नामक तीर्थ में श्री महाप्रभुजी ने शमी वृक्ष के नीचे भागवत् सप्ताह पारायण किया।
पता: व्यास गंगा
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। कभी ममंदराचल पर शमी वृक्ष के नीचे श्री महाप्रभुजी की बैठक है। यहां श्री महाप्रभुजी ने भागवत सप्ताह कियाधुसूदन ठाकुरजी के मंदिर में पधारकर आपश्री ने उनका सेवा श्रृंगार किया।
पता: मंदराचल
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यह स्थान इलाहाबाद में प्रयाग संगम के सम्मुख है। बैठक के स्थान को देव रखिया कहते है। यहां कई पण्डित शास्त्रार्थ करने के लिए पहुंच जाते थे, इससे भगवत् सेवा में कई बार व्यवधान उपस्थित होता था।
पता: पो. नैनी जिला इलाहाबाद (उ.प्र.)
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इस स्थान को चुनार भी कहते है। एक ब्राह्मण को श्री विठ्ठलनाथजी का स्वरूप प्राप्त हुआ जिन्हे श्रीमहाप्रभुजी को आकर पधराया । उसी समय श्री महाप्रभुजी को पुत्र जन्म की सूचना मिली।
पता: जिला मिर्जापुर (उ.प्र.)
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