षोडश ग्रंथ

श्री महाप्रभुजी वल्लभाचार्य जी- श्री सुबोधिनी

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1.प्रथम स्कंध,द्वितीय स्कंध– सार और सुबोधिनी टीका

पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

विषय: धर्म, भक्ति, भागवत श्रवण की महिमा और श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप की स्थापना,विषय: सृष्टि की रचना, श्रीहरि की विराट मूर्ति, ब्रह्मोपासना

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2.सुबोधिनीजी दशम स्कंध जन्म प्रकरण

पता: वल्लभ विद्यापीठ, नाथद्वारा (राजस्थान)

सुबोधिनीजी श्रीमद्भागवत का प्रसिद्ध टीकाकार ग्रंथ है, जो शुद्धाद्वैत (वल्लभाचार्य जी के दर्शन) के अनुसार भगवद्भक्ति और भेद-भाव समझाता है।

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3.श्री सुबोधिनीजी,तमस् प्रमाण प्रकरण

पता: श्रीनाथजी प्रकाशन, नाथद्वारा, राजस्थान

महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य द्वारा रचित श्रीमद्भागवत पर एक विशिष्ट टीका है, जो पुष्टिमार्गीय दर्शन का आधारभूत ग्रंथ है। इसका दशम स्कंध (दसवां अध्याय) विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिसमें "तमस् प्रमाण प्रकरण" (अध्याय 5 से 14) शामिल है।

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4.श्री सुबोधिनीजी– (6) दशम स्कंध /साधनप्रकरण

पता: श्रीनाथजी प्रकाशन, नाथद्वारा, राजस्थान

महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य द्वारा रचित श्रीमद्भागवत पर एक विशिष्ट टीका है, जो पुष्टिमार्गीय दर्शन का आधारभूत ग्रंथ है। इसका दशम स्कंध (दसवां अध्याय) विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैजिसमें "तमस् प्रमाण प्रकरण" शामिल है।