पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा (राजस्थान)
श्री वल्लभाचार्य जी का एक गहन दर्शनीय ग्रंथ है, जिसमें शुद्धाद्वैत वेदांत के सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से स्थापित किया गया है। यह ग्रंथ प्रमुख रूप से दो खंडों में विभाजित है:
पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा (राजस्थान)
श्रीमद्भागवत महापुराण का शुद्धाद्वैत वेदांत के आधार पर तात्त्विक अर्थ प्रकट करना। स्पष्ट करना कि भागवत का मूल उद्देश्य केवल कथा नहीं, बल्कि भगवद्सेवा और प्रेम में स्थिरता है।
पता: श्रीनाथजी प्रकाशन, नाथद्वारा, राजस्थान
भागवतार्थ प्रकरण में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य ने श्रीमद्भागवत के गूढ़ अर्थों की व्याख्या की है। इस प्रकरण में उन्होंने शुद्धाद्वैत दर्शन के आधार पर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उनके महत्व को स्पष्ट किया है।