पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा
श्री हरिराय जी ने पुष्टिमार्ग की परंपरा में "वादावली" लिखी थी — जिसे आज हम "हरिरायजी कृत वादावली" या हरिरायजी की वंशावली / गादी विवरण के रूप में जानते हैं।