षोडश ग्रंथ

श्री हरिराय जी के प्रमुख ग्रंथ

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1.गुणपारायण

पता: श्रीनाथजी मंदिर परिसर, नाथद्वारा, जिला राजसमंद,

एक अत्यंत प्रतिष्ठित और भावपूर्ण ग्रंथ है, जिसे श्री गोस्वामी हरिराय जी महाराज ने रचा था। यह ग्रंथ पुष्टिमार्गीय भक्तिधारा में अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। यह ग्रंथ श्रीकृष्ण के अनंत गुणों का पारायण (स्तवन / गुणगान) है ।

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2.नवधा भक्ति प्रकाश

पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

एक अत्यंत भावपूर्ण और शिक्षाप्रद ग्रंथ है, जिसकी रचना श्री गोस्वामी हरिराय जी महाराज ने की थी। यह ग्रंथ नवधा भक्ति (भक्ति के नौ प्रकार) को पुष्टिमार्ग की दृष्टि से उजागर करता है — यानी वैष्णव जीवन में इन नौ प्रकार की भक्ति का क्या स्थान है, और ये भगवान श्

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3.आश्रय निर्णय

पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

पुष्टिमार्ग और शुद्धाद्वैत वेदांत में एक महत्वपूर्ण विषय है। यह ग्रंथ या विषय जीवन के एक गहरे तत्व—आश्रय (आधार, शरण) का निर्णय और विवेचन करता है। खासतौर से, यह बताता है कि जीव किस आधार या आश्रय में अपनी मुक्ति, शांति और आत्मा का समाधान प्राप्त कर सकता है।

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4.निर्णय आमृत

पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जो पुष्टिमार्गीय दर्शन और शुद्धाद्वैत वेदांत से जुड़ा हुआ है। यह ग्रंथ प्रमुख रूप से श्री हरिराय जी महाराज द्वारा रचित माना जाता है, जो श्री गोकुलनाथजी के पुत्र और वल्लभ संप्रदाय के प्रमुख आचार्य थे। यह ग्रंथ वैष्णवों को धर्म, सेवा,

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5.श्रीवल्लभ-भावाष्टकम्

पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

"श्रीवल्लभ-भावाष्टकम्" एक अत्यंत भावपूर्ण स्तोत्र है जो श्री वल्लभाचार्य जी के चरणों में गहन प्रेम और पूर्ण समर्पण का भाव प्रकट करता है। यह स्तोत्र श्री हरिराय जी महाराज द्वारा रचित माना जाता है, और इसमें आठ श्लोकों के माध्यम से श्री वल्लभ के स्वरूप, गुण,

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6. पञ्चपद्यानी

पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

एक अत्यंत लघु किन्तु गहन तात्त्विक ग्रंथ है, जो पुष्टिमार्ग की मूलभूत शिक्षाओं और भक्ति के रहस्यों को केवल पाँच श्लोकों (पद्य) में प्रस्तुत करता है। यह ग्रंथ श्री हरिराय जी महाराज द्वारा रचित माना जाता है।,

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7.श्रीवल्लभचरण-विज्ञप्ति

पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

एक अत्यंत मार्मिक और श्रद्धामयी रचना है, जो श्री हरिराय जी महाराज द्वारा अपने परम उपास्य, परमगुरु और संप्रदाय के प्रवर्तक श्री वल्लभाचार्य जी के चरणों में की गई पूर्ण आत्मनिवेदनात्मक प्रस्तुति (विज्ञप्ति) है।

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8.भक्तिरस प्रकरण

पता: nathdwr

पुष्टिमार्गीय साहित्य में एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह ग्रंथ श्री हरिराय जी महाप्रभु द्वारा रचित माना जाता है, जो श्री वल्लभाचार्य जी के परपोत्र एवं पुष्टिमार्ग के सुविख्यात आचार्य थे।

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9.भक्तिरस सिद्धान्त

पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

पुष्टिमार्ग के मूलभूत ग्रंथों में से एक है, जो भक्ति के रस (आनंदस्वरूप प्रेम) के तात्त्विक स्वरूप और उसकी सिद्धि के नियमों को स्पष्ट करता है। यह ग्रंथ आमतौर पर श्री हरिराय जी या उनके परंपरागत शिष्यों द्वारा रचित माना जाता है।

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10.नवम संकल्प

पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

पुष्टिमार्गीय परंपरा का एक अत्यंत भावनात्मक और तात्त्विक रूप से समृद्ध ग्रंथ है। यह ग्रंथ विशेष रूप से श्री हरिराय जी द्वारा प्रणीत माना जाता है और इसका उद्देश्य है — शुद्ध पुष्टिमार्गीय साधक के अंतःकरण में स्थिर होने वाले संकल्पों का निदान, जिन्हें लेकर

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11.गर्वापहाराष्टकम्

पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

एक अत्यंत सुंदर एवं भावपूर्ण संस्कृत स्तोत्र है, जिसकी रचना श्री हरिराय जी महाप्रभु द्वारा मानी जाती है। यह ग्रंथ भक्त के अहंकार–त्याग, नम्रता, और पूर्ण आत्मसमर्पण के भाव को प्रकट करता है।

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12.प्रामाणिकाष्टकम्

पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

एक अत्यंत महत्वपूर्ण पुष्टिमार्गीय स्तोत्र है जिसकी रचना श्री हरिराय जी महाप्रभु द्वारा की गई मानी जाती है। यह स्तोत्र प्रमाण, शरणागति, और शुद्ध भक्तिपथ के सिद्धांतों को स्पष्ट करता है।

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13.श्रीवैश्वानराष्टकम्

पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

एक दुर्लभ एवं गूढ़ पुष्टिमार्गीय स्तोत्र है, जिसकी रचना श्री हरिराय जी महाप्रभु द्वारा मानी जाती है। यह स्तोत्र श्रीगुरु के स्वरूप — विशेषकर श्रीगुसाईंजी श्री विट्ठलनाथजी (वैश्वानर स्वरूप) — की महिमा, तत्व और शरणागति के भाव को प्रकट करता है।

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14.श्री गोकुलेश सेवनिकम्"

पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

एक अत्यंत दुर्लभ और भावपूर्ण ग्रंथ है, जो पुष्टिमार्गीय सेवा सिद्धांतों पर आधारित है। इसका प्रमुख उद्देश्य है — श्रीनाथजी (गोकुलेश) की सेवा किस भावना और विधि से की जानी चाहिए, इसका स्पष्ट निर्देश देना।

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15.श्रीनिजाचार्याष्टकम्

पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

एक अत्यंत भावपूर्ण ग्रंथ है, जो पुष्टिमार्गीय परंपरा में अपने निजाचार्य (श्रीगुरु) के प्रति पूर्ण समर्पण, भक्ति और कृतज्ञता व्यक्त करता है। यह ग्रंथ श्री हरिराय जी महाप्रभु द्वारा रचित माना जाता है।

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16.स्वमार्ग सर्वस्वम्

पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा

एक विशिष्ट और गूढ़ ग्रंथ है जो पुष्टिमार्ग के मूलभूत सिद्धांतों, आचारों और भावों को अत्यंत संक्षिप्त, स्पष्ट और सारगर्भित रूप में प्रस्तुत करता है। यह ग्रंथ श्री हरिराय जी महाप्रभु द्वारा रचित माना जाता है, और इसे पुष्टिमार्ग का संक्षिप्त सार भी कहा जाता