पता: श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा
भागवतम् में वर्णित एक अत्यंत प्रसिद्ध स्तुति है, जो वृत्रासुर द्वारा श्रीहरि (भगवान विष्णु) की शरण में कही गई थी। ये चार श्लोक भागवत पुराण (स्कंध 6, अध्याय 11) में आते हैं।