श्री गोवर्धननाथ जी

16.कोकिलावन

16.कोकिलावन

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महाप्रभुजी से आचार्य होने व अनेक शास्त्रार्थो में विजयी होने की खुशी में खीर का भोग देने का प्रस्ताव किया। आपने कृष्णदास मेघन से पांच सेर दूध मंगवाया और वीर तैयार की। श्री महाप्रभुजी की दृष्टि मात्र से वह रवीर अक्षय हो गई। सभी हजार नागाओं ने भर पेट प्रसा