हम भी छः माह रह कर श्रीनंदरायजी को श्रीभागवत् सुनावेंगे । एक समय आचार्य श्री पान सरोवर पर बैठे थे तभी एक मुगल घोडे को पानी पिलाने लाया। आपकी दृष्टिमात्र से घोडे को मुक्ति मिली और वह चतभेज स्वरूप धारणकर विमान में बैठ कर बैकंठ को गया। यह आश्चर्य देखकर मु