श्री गोवर्धननाथ जी

14.संकेतवन

14.संकेतवन

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सात दिन तक आपकी भागवत में एक सोलह वर्षीय बहुत सुन्दर स्त्री अनेक आभूषण पहिने रत्न जटित दांड़ी को चमर लेके श्री महाप्रभुजी को चमर करती। जब कथा आरंभ होती तो आती और कथा समाप्त होते ही अंर्तध्यान हो जाती। तब वैष्णवों के पूछने पर श्री महाप्रभुजी ने बतलाया